जानिए झारखंड के नये मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का राजनीतिक सफर

चंपई सोरेन: झारखंड टाइगर से मुख्यमंत्री तक का सफर

झारखंड की राजनीति के इतिहास में, चंपई सोरेन का नाम विकास और जनता के समर्पित सेवा के लिए जाना जाता है। 11 सितंबर, 1954 को जन्मे, 68 वर्षीय नेता ने विभिन्न पदों पर महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं, जिससे क्षेत्र के राजनीतिक परिदृश्य पर एक विशेष छाप छोड़ी है।


झारखंड के नये मुख्यमंत्री चंपई सोरेन
झारखंड के नये मुख्यमंत्री चंपई सोरेन

झमुमो शहर से आने वाले चंपई सोरेन भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के 2 साल और 129 दिनों के दौरान प्रमुखता से उभरे, जहाँ उन्हें भाजपा नेता अर्जुन मुंडा द्वारा कैबिनेट मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। 11 सितंबर, 2010 से 18 जनवरी, 2013 तक सेवा करते हुए, चंपई सोरेन ने अपने कार्यकाल के दौरान शासन में अपनी कुशलता का प्रदर्शन किया।


चंपई सोरेन कौन है?

चंपई सोरेन को बीजेपी नेता अर्जुन मुंडा की 2 साल, 129 दिन की सरकार में मंत्री बनाया गया था। उन्होंने 11 सितंबर 2010 से 18 जनवरी 2013 तक मंत्री का कार्य निभाया। उम्र: 68, शिक्षा: मैट्रिक पास, परिवार: पत्नी, चार बेटे, तीन बेटियां।वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उपाध्यक्ष हैं, इस पद पर वे पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रतिनिधित्व करते हुए सरायकेला निर्वाचन क्षेत्र से विधायक भी हैं।

मंत्री के रूप में भाजपा सरकार का हिस्सा रहे चंपई सोरेन अपने साथ शासन में काफी अनुभव लेकर आए हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा झारखंड के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने से गहराई से जुड़ी हुई है, जो उन्हें इस क्षेत्र में एक दिग्गज बनाती है। चंपई सोरेन के राजनीतिक जीवन में उल्लेखनीय घटनाओं में से एक बिहार-झारखंड विभाजन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, जहाँ उन्होंने शिबू सोरेन के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

इस उद्देश्य के लिए उनके योगदान ने उन्हें "झारखंड टाइगर" का उपनाम दिलाया। चंपई सोरेन ने 1991 में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और विजयी शुरुआत की। 1995 में, उन्होंने झामुमो के टिकट पर जीत हासिल की, जिससे उनके राजनीतिक करियर की नींव रखी गई। 2005 से, चंपई सोरेन सरायकेला निर्वाचन क्षेत्र से लगातार विधायक रहे हैं, और समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ लोगों की सेवा कर रहे हैं। 

उनके योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें 2019 में परिवहन, एससी-एसटी कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।
जसे-जैसे झारखंड विकसित हो रहा है, चंपई सोरेन जैसे नेता इसके भाग्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जीत और चुनौतियों से भरी उनकी यात्रा, महत्वाकांक्षी राजनेताओं और नागरिकों को समान रूप से प्रेरित करती है, जिससे वे क्षेत्र के राजनीतिक परिदृश्य में मुख्यमंत्री बन गए हैं। 

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